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Wednesday, 2 May 2018

बाबासाहेब ने संविधान द्वारा महिलाओं को वो सारे अधिकार दिए, जो मनुस्मृति ने नकारे थे


14 अप्रैल पूरे देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में बड़े ही उत्साह व जुनून से मनाया जाता है। इस वर्ष बाबा साहब की 127 वीं जयंती मनाई जा रही है। दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक और पश्चिम भारत से पूर्वी भारत में डॉ. अंबेडकर जयंती की रौनक देखते ही बनती है। डॉ. अम्बेडकर के कार्यों व चिंतन के बारे में बात करें तो अक्सर बात दलित वर्गों तक आकर, यहाँ तक कि बात आरक्षण पर आ कर रुक जाती है। आज़ाद भारत में डॉ. अम्बेडकर को दलितों का मसीहा कहा जाता है। जबकि डॉ. अम्बेडकर के समस्त कार्यो का मूल्यांकन करें तो हम पाएंगे कि वे एक कुशल अर्थशास्त्री, समाजवैज्ञानिक, कानून विशेषज्ञ, मजदूर नेता थे। पत्रकारिता में प्रखर विद्वान् और महिलाओ के अधिकार के चैम्पियन थे। उनके पहले महिलाओं से संबन्धित उन तमाम अधिकार उन्हें प्राप्त नहीं थे जो आज कानून के दम पर मिल रहा है। इसका श्रेय उन्हीं को जाता है।

 

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http://www.hastakshep.com/hindiopinion/dr-ambedkar-by-anish-kumar-17125