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Tuesday, 23 August 2016

आजादी के 69 वर्ष : हम कितने आजाद

          हम आजादी के 69वां वर्ष मनाने जा रहे हैं । आजादी के जश्न में हम पूरी तरह सराबोर हो जाते हैं । कहा जाता है कि हम वहीं तक आजाद हैं जहां से दूसरे की नाक शुरू होती है । आजादी एक ऐसा शब्द जो शरीर को झकझोर कर रख देता है । हम एकदम कुछ करने के लिए तन मन धन से तत्परता से आगे आ जाते हैं । आजादी हमें जीने के मायने व तौर तरीके सिखाती है । 15 अगस्त 1947 कि आधी रात से ही भारत आजाद होकर एक लोकतान्त्रिक देश बन गया । तब से लेकर आज तक हम आजादी का जश्न मानते चले आ रहे हैं ।

          मनुष्य हमेशा अपने आपको आजाद रखना चाहता है । समय समय पर आजादी के मायने बदलते गए और हम अपने आप को आजाद मानते गए । किसी भी आजादी उस देश की समस्त जनता की आजादी है । यह आजादी किसी को इतना आजाद कर दे की वह अपने को मनुष्य से भी ऊपर समझने लगे और किसी की आजादी इतनी छीन लिया जाए कि उसे पशु से भी बदतर जीने को मजबूर होना पड़े, यह बात समझ से परे लगती है । आज हमारे सामने तमाम मानवीय कुरीतियों मुँह बाए खड़ी हैं ।

ü जिस देश कि आधी जनता भूखे पेट सोने पर मजबूर हो ।

ü जिस देश में मनुष्य कि पहचान प्रतिभा से नहीं बल्कि उसकी जाति से की जाती हो ।

ü जिस देश में धर्म मनुष्य से ऊपर हो ।

ü जिस देश में लोकतान्त्रिक तरीके से हक़ व अधिकार मांगने पर पुलिस की लाठी का शिकार होना पड़े ।

ü जिस देश में महिलाओं को समानता का अधिकार न हो बल्कि उन्हें मानवीय ज़्यादतियों का सामना करना पड़े ।

ü जहां सरेआम बलात्कार, लूट, हत्या, अपहरण आदि घटनाएँ हों ।

ü महिलाओं को डायन के नाम पर सरेआम उनको पीटना, उनकी बेइज्जती करना ।

 ü जिस देश में किसान गरीबी के चलते अत्महत्या करने को मजबूर हो।