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Monday, 2 October 2017

दुनिया बदल गई--- कविता

दुनिया बदल गई--- कविता

काली रात के 
अतल गहराइयों में
टिमटिमाता छोटा सा दिया
उसके झुरमुट में
बेनाम शख्स
एक अदद रोटी के इंतजार में 
देहरी से सटकर बैठा है।
काली स्याह रात में 
कुत्तो की आवाज
भूख के आगे बौनी हो गई है।
आंख लगातार बंद होने का इंतजार कर रही है
तभी कुछ हलचल होती है
आंख तुरंत उसी ओर गई
शायद कोई रोटी लेकर 
सामने खड़ा था
वह शख्स जोर से उठ खड़ा हुआ
आवाज गायब थी
सामने कोई नहीं था
पेट लाचार था
आंखें बेबस थीं
सुबह हुई
दुनिया जैसे बदल गई
मौसम बदल गया
उसके सामने 
अब नहीं थी समस्या
खाने की 
क्योंकि आंखे बंद थी 
पेट शांत था 
वह अब इस दुनिया में 
नहीं था।।।

- अनीश कुमार

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